ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने नई स्कीम शुरू की है. इसके लिए किसानों को स्पेशल ट्रेनिंग के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि कम से कम रसायन पदार्थों का प्रयोग किया जाए. हरियाणा सरकार ने ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई स्कीम शुरू की है. इसके तहत ऑर्गेनिक खेती करने के इच्छुक किसानों को सरकार की तरफ से स्पेशल ट्रेनिंग के साथ-साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी. इसके लिए इच्छुक किसानों को सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर एप्लाई करना होगा. कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गिरीश नागपाल द्वारा यह जानकारी दी गयी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से खाद खरीदना लगातार मुश्किल होता जा रहा है, इसलिए रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खेती पर ज़्यादा ज़ोर देने की ज़रूरत है। भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा केंद्र सरकार किसानों के लिए खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने सब्सिडी वाली खाद के गलत इस्तेमाल के प्रति आगाह किया और राज्यों से नकली और घटिया क्वालिटी की खाद बेचने वाले सप्लायरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा। केंद्रीय मंत्री ने खाद सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार द्वारा 41,000 करोड़ रुपये की मंज़ूरी का भी ज़िक्र किया और किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री चौहान ने किसानों को ऐसी फसलें चुनने की सलाह दी, जिन पर बारिश में होने वाले उतार-चढ़ाव का कम असर पड़ता हो। सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस साल 1 जून से 15 जून तक देशव्यापी "खेत बचाओ अभियान" चलाया जाएगा।
खाद के बढ़ते दामों के बीच पीएम मोदी ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया है।
'ऑर्गेनिक फार्मिंग' जैविक खेती कृषि की वह पद्धति है, जिसमें पर्यावरण को स्वच्छ प्राकृतिक संतुलन को कायम रखते हुए भूमि, जल एवं वायु को प्रदूषित किये बिना दीर्घकालीन व स्थिर उत्पादन प्राप्त किया जाता है। इस पद्धति में रसायनों का उपयोग कम से कम व आवश्यकतानुसार किया जाता है।
लखनऊ विश्वविद्यालय का जंतु विज्ञान विभाग रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में जैविक कीट नियंत्रण की नई तकनीक विकसित करने की दिशा में काम करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' कार्यक्रम के तहत विभाग की एक शोध परियोजना को चार लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह अध्ययन सहायक आचार्या डॉ. तृप्ति यादव के नेतृत्व में संचालित किया जाएगा, जो समेकित कीट प्रबंधन प्रणाली को एक नई दिशा देने में सहायक होगा। इस शोध का मुख्य केंद्र 'मित्र कीट' मानी जाने वाली लेडीबर्ड बीटल है। वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन करेंगे कि लेडीबर्ड बीटल द्वारा छोड़ी गई गंध और प्राकृतिक रासायनिक संकेतों का उपयोग कर हानिकारक कीटों, जैसे माहू और लाही, को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। शोध में यह देखा जाएगा कि इन रासायनिक अवशेषों का हानिकारक कीटों के व्यवहार, उनके भोजन ग्रहण करने की प्रवृत्ति, विकास और प्रजनन दर पर क्या प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लेडीबर्ड की मौजूदगी से उत्पन्न भय का प्रभाव भी हानिकारक कीटों की संख्या कम करने में सहायक हो सकता है। प्रारंभिक प्रयोगशाला अध्ययनों में लेडीबर्ड बीटल के अर